भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में सुधार और नियमों को सरल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आरबीआई ने 11 फरवरी, 2026 को एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की, जिसमें 27 जनवरी, 2021 को लागू किए गए ‘बैंकों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने’ संबंधी सर्कुलर को वापस ले लिया गया है। यह जानकारी बैंक ग्राहकों और वित्तीय संस्थानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आपकी शिकायतों के समाधान और मुआवजे की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इस बदलाव का मकसद पुराने नियमों के दोहराव को खत्म करना और नई एकीकृत लोकपाल योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है।

RBI का क्या है पूरा फैसला?
आरबीआई की मुख्य महाप्रबंधक डॉ. नीना रोहित जैन द्वारा जारी की गई इस अधिसूचना में बताया गया है कि 2021 के पुराने निर्देशों की समीक्षा की गई है। हाल के नियामक और पर्यवेक्षी विकासों को ध्यान में रखते हुए, अब पुराने सर्कुलर को तुरंत प्रभाव से वापस लिया गया है और इसे रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय RBI 2021 सर्कुलर को बेहतर बनाने और RBI शिकायत निवारण नियमों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए लिया गया है।
2021 का सर्कुलर क्या था?
27 जनवरी, 2021 को जारी सर्कुलर (RBI/2020-21/87) का मुख्य उद्देश्य बैंकों की आंतरिक शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना था। इसमें बैंकों द्वारा शिकायतों के निपटारे में होने वाली देरी पर नजर रखने का प्रावधान था। यह RBI ओम्बड्समैन योजना के साथ मिलकर काम करता था, ताकि ग्राहकों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर समाधान मिल सके। इसके तहत बैंकों को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में शिकायतों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया था।
RBI ने सर्कुलर वापस क्यों लिया?
सर्कुलर वापस लेने के पीछे मुख्य RBI सर्कुलर को वापस लेने के कारण निम्नलिखित हैं:
- नियमों का एकीकरण: 28 नवंबर, 2025 को वित्तीय विवरणों के प्रकटीकरण पर नए मास्टर डायरेक्शन जारी किए गए हैं, जिनमें पहले से ही शिकायतों के खुलासे को शामिल किया गया है।
- मजबूत मुआवजा ढांचा: ‘रिजर्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, 2026′ अब और भी प्रभावशाली हो गई है।
- दोहराव से बचाव: जब नए नियम पहले से लागू हो चुके हैं, तो पुराने 2021 के नियमों को बनाए रखना केवल कागजी कार्रवाई को बढ़ा रहा था।
बैंक ग्राहकों पर क्या होगा असर?
RBI के नए बैंकिंग नियमों के अनुसार, ग्राहकों के लिए एक अच्छी खबर है कि अब सुरक्षा कवच और भी मजबूत हो गया है:
- बढ़ा हुआ मुआवजा: नई योजना के तहत मुआवजे की सीमा को बढ़ा दिया गया है।
- त्वरित समाधान: आंतरिक लोकपाल (Internal Ombudsman) को अब मुआवजा देने की सिफारिश करने का अधिकार मिल गया है, जिससे बैंक स्तर पर ही शिकायतों का समाधान जल्दी हो सकेगा।
- कोई नकारात्मक असर नहीं: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि सर्कुलर की वापसी से ग्राहकों के प्रति बैंकों की जवाबदेही कम नहीं होगी।
बैंकों के लिए क्या बदलाव?
अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (आरआरबी को छोड़कर) के लिए अनुपालन की प्रक्रिया में बदलाव होने जा रहा है:
- बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियां: बैंकों को अब अपनी खुद की बोर्ड-अनुमोदित नीतियों और मौजूदा पर्यवेक्षी निर्देशों के आधार पर आंतरिक प्रणालियों को और मजबूत करना होगा।
- पर्यवेक्षी मूल्यांकन: बैंकों का शिकायत निवारण तंत्र अब भी आरबीआई की नियमित निगरानी और ‘सुपरवाइजरी असेसमेंट’ के अधीन रहेगा।
आगे क्या हो सकता है?
आरबीआई ने यह स्पष्ट किया है कि वह बैंकिंग सेवाओं की निरंतर निगरानी कर रहा है। आने वाले समय में डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक के लिए और अधिक विस्तृत ‘कस्टमर प्रोटेक्शन गाइडलाइंस’ जारी होने की संभावना है। बैंकों को अब 2026 के नए लोकपाल निर्देशों के अनुसार अपने आईटी पोर्टल और शिकायत फॉर्म को अपडेट करना होगा।
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FAQ Section
Q1. RBI ने 2021 का सर्कुलर क्यों वापस लिया?
नियमों को युक्तिसंगत बनाने और 2025-26 में जारी नए मास्टर डायरेक्शंस के साथ दोहराव से बचने के लिए इसे वापस लिया गया है।
Q2. क्या बैंक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया बदलेगी?
प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आएगी, बल्कि आंतरिक लोकपाल को मिली नई शक्तियों से ग्राहकों को अब बेहतर समाधान और मुआवजे की उम्मीद रहेगी।
Q3. RBI Ombudsman योजना क्या है?
यह एक स्वतंत्र प्रणाली है जहाँ ग्राहक बैंक द्वारा सुनवाई न होने पर शिकायत कर सकते हैं। 2026 की नई योजना में मुआवजे के दायरे को बढ़ाया गया है।
Q4. ग्राहकों को इस फैसले से क्या फायदा होगा?
ग्राहकों को अब अधिक प्रभावी शिकायत निवारण और बढ़े हुए मुआवजे का लाभ मिलेगा, साथ ही बैंकों की आंतरिक प्रणालियां अधिक पारदर्शी होंगी।