सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: क्या WhatsApp इस्तेमाल करना आपका मौलिक अधिकार है?
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले (डॉ. रमन कुंद्रा बनाम व्हाट्सएप एलएलसी, मेटा प्लेटफॉर्म और अन्य) में फैसला सुनाया है, जो उन करोड़ों भारतीयों के लिए आँखें खोलने वाला है जो अपनी आजीविका और दैनिक संचार के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर हैं। याचिकाकर्ताओं, जो पेशे से डॉक्टर थे, का WhatsApp अकाउंट अचानक ब्लॉक कर दिया गया था। उन्होंने अपनी रोजी-रोटी प्रभावित होने का हवाला देते हुए, इसे मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 32) का उल्लंघन बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एकदम स्पष्ट रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि WhatsApp का उपयोग करना कोई मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है, जिसके लिए अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की जा सके।
- निर्णय का सार: अदालत ने कहा कि WhatsApp एक निजी कंपनी है और वह भारत के संविधान का हिस्सा नहीं है, जिस पर राज्य के समान नियम लागू किए जा सकें।
- कोर्ट का सुझाव: यदि किसी का सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक होता है, तो वे नागरिक अदालत (Civil Court) का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन सीधे सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल नहीं की जा सकती।
- नियमों का पालन अनिवार्य: कोर्ट ने उपयोगकर्ताओं को WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कोड ऑफ कंडक्ट (Code of Conduct) और गाइडलाइन्स का सख्ती से पालन करने की सलाह दी।
⚠️ आपका अकाउंट क्यों हो सकता है ब्लॉक?
कई बार यूजर्स बिना कोई चेतावनी या कारण जाने अपना अकाउंट ब्लॉक पाते हैं। इसका मुख्य कारण प्लेटफॉर्म के नियमों का उल्लंघन करना है, भले ही वह अनजाने में हुआ हो।
- न्यूडिटी/सेक्सुअल कंटेंट: जैसा कि एक कर्मचारी के उदाहरण से स्पष्ट हुआ, प्लेटफॉर्म न्यूडिटी या सेक्सुअल सामग्री को बढ़ावा देने वाले किसी भी पोस्ट, यहाँ तक कि किसी घटना की रिपोर्टिंग के स्क्रीनशॉट को भी, प्रतिबंधित कर सकता है।
- नफरत भरे संदेश और अफवाहें: WhatsApp के नियम स्पष्ट करते हैं कि आप नफरत फैलाने वाले, अशोभनीय संदेश या झूठी/भ्रामक खबरें नहीं फैला सकते।
- बिना पढ़े उपयोग: अधिकांश यूजर्स ऐप डाउनलोड करते समय कंपनी की उपयोग की शर्तें (Terms & Conditions) नहीं पढ़ते, जिससे वे अनजाने में नियमों का उल्लंघन कर बैठते हैं।
🇮🇳 स्वदेशी विकल्प क्यों अपनाएं?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारत सरकार के नियंत्रण और नियमों की कमी को देखते हुए, कोर्ट ने भी स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के उपयोग का सुझाव दिया।
- विकल्प: Joho द्वारा संचालित Arattai जैसे भारतीय ऐप्स का इस्तेमाल करें। इन प्लेटफॉर्म्स पर भारत सरकार का नियंत्रण और नियमन कहीं अधिक है, जो भविष्य में होने वाली ऐसी परेशानियों से बचा सकता है।
- सरकारी समर्थन: केंद्रीय मंत्री अमित शाह और अश्विनी वैष्णव जैसे गणमान्य व्यक्ति भी अब इन स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं, जो इनकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।
🤔 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

