देश के किसानों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। केंद्र की मोदी सरकार किसानों की आय और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक अभूतपूर्व पहल करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर ‘PM धनधान्य कृषि योजना’ लॉन्च करेंगे।
यह योजना कोई अकेली पहल नहीं, बल्कि ₹24,000 करोड़ के बजट वाली एक महा-योजना है, जिसका उद्देश्य पहले से चल रही 36 केंद्रीय योजनाओं की ताकत को एकजुट करके किसानों तक पहुंचाना है। इसका लक्ष्य देश के 100 सबसे कम प्रदर्शन करने वाले कृषि जिलों की तस्वीर बदलना है।
PM धनधान्य कृषि योजना की मुख्य बातें
‘प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना’ को 16 जुलाई 2025 को केंद्रीय कैबिनेट ने 6 साल के लिए मंजूरी दी थी। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह योजना 11 अक्टूबर से शुरू होगी।
क्या है PM धनधान्य कृषि योजना?

यह योजना 2025-26 से 2030-31 तक 6 सालों के लिए चलाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन 100 जिलों को चुनना है जहाँ कृषि उत्पादन कम है। इन जिलों में उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए जाएंगे। इस योजना का कुल अनुमानित खर्च ₹1,44,000 करोड़ होगा, जिसमें हर साल ₹24,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
इस योजना के तीन प्रमुख मापदंड हैं, जिनके आधार पर जिलों का चयन किया जाएगा:
- कम कृषि उत्पादन: ऐसे जिले जहाँ प्रति हेक्टेयर पैदावार राष्ट्रीय औसत से कम है।
- कम फसल तीव्रता (Cropping Intensity): वे जिले जहाँ किसान साल में केवल एक या दो फसलें उगाते हैं, जबकि वहाँ तीन फसलें उगाने की क्षमता है।
- कम कृषि ऋण (Agricultural Credit): ऐसे जिले जहाँ किसानों को खेती के लिए पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता है।
कैसे काम करेगी यह योजना?
इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन स्तरों पर समितियाँ बनाई जाएंगी:
- जिला स्तर पर समिति: प्रत्येक चयनित जिले में ‘जिला धनधान्य समिति’ का गठन किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी (कलेक्टर) होंगे, जबकि सदस्यों में प्रमुख किसान, कृषि अधिकारी और कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह समिति जिले की जरूरतों के हिसाब से एक विशिष्ट ‘जिला कृषि और सहायक गतिविधि योजना’ (District Agriculture and Allied Activities Plan) तैयार करेगी।
- राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां: जिला समितियों के अलावा, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी समितियां होंगी जो योजना की निगरानी और क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगी।
यह योजना ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ की तरह काम करेगी, जिसका लक्ष्य कृषि क्षेत्र में पिछड़ रहे जिलों को आगे लाना है।
किन योजनाओं का होगा समावेशन?
PM धनधान्य कृषि योजना कोई नई योजना नहीं है, बल्कि यह मौजूदा 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं को एक साथ लाएगी। इसका उद्देश्य इन योजनाओं का समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। इसमें शामिल होने वाली कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
- खाद्य सुरक्षा मिशन
- फसल बीमा योजना
- कृषि बागवानी मिशन
- पशुपालन और मत्स्यपालन योजनाएं
- कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड
इन योजनाओं को एक ही मंच पर लाकर, किसानों को सिंचाई, प्रशिक्षण, ऋण और भंडारण जैसी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।
PM धनधान्य कृषि योजना के उद्देश्य और लाभ
इस योजना के कई दीर्घकालिक उद्देश्य और लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:
- किसानों की आय में वृद्धि: उत्पादन और मूल्य वर्धन बढ़ने से किसानों की आय में सीधे तौर पर वृद्धि होगी।
- रोजगार सृजन: कृषि और उससे जुड़े उद्योगों, जैसे फूड प्रोसेसिंग में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- आत्मनिर्भर भारत: कृषि उत्पादन बढ़ने से देश खाद्य सुरक्षा के मामले में और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
यह योजना न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूत करेगी, बल्कि देश के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
अधिक जानकारी के लिए, आप केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट agriwelfare.gov.in पर जा सकते हैं।
दालों में आत्मनिर्भरता और ‘गेम चेंजर’ पहल
इस योजना का एक बड़ा फोकस देश को दलहन (दालों) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
- लक्ष्य: 2030-31 तक दलहन की खेती का क्षेत्रफल 27.7 मिलियन हेक्टेयर से बढ़ाकर 31 मिलियन हेक्टेयर करना।
- रणनीति: केंद्र सरकार प्रस्तावित योजना के तहत देश में उत्पादित दालों की खरीद भी करेगी, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।
- गेम चेंजर: नीति आयोग के एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट मॉडल पर आधारित यह योजना, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और फसलों के विभेदकरण (Diversification) के लिए एक केंद्रित और समन्वित प्रयास है।
🎣 अन्य बड़ी घोषणाएं: मत्स्य और पशुपालन
प्रधानमंत्री मोदी इस मौके पर केवल ‘PM धनधान्य कृषि योजना’ ही नहीं, बल्कि ‘डीप सी फिशिंग नीति’ की शुरुआत भी करेंगे।
- इसके अतिरिक्त, पशुपालन, मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी ₹5,000 करोड़ की 56 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया जाएगा।
- यह पहल कृषि क्षेत्र के सहायक व्यवसायों को भी मजबूती प्रदान करेगी।
✅ किसानों को क्यों नहीं लगाने पड़ेंगे अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर?
‘पीएम धनधान्य स्कीम’ की सबसे बड़ी ताकत इसका समन्वित दृष्टिकोण है। यह योजना इस सोच पर आधारित है कि बिखरी हुई योजनाओं से नहीं, बल्कि एक केंद्रित प्रयास से ही किसानों की समस्याओं का स्थाई समाधान हो सकता है।
इस महा-योजना के तहत, 11 अलग-अलग मंत्रालयों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़ा जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि:
किसानों को अब अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सभी योजनाओं का फायदा एक ही जगह, एक समन्वित तरीके से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
यह कदम केंद्र सरकार के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। कृषि मंत्री का मानना है कि अगले 6 सालों में किसानों की आर्थिक हालत में काफी हद तक सुधार होगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. प्रधानमंत्री धनधान्य कृषि योजना कब तक चलेगी?
A: यह योजना 2025-26 से शुरू होकर 2030-31 तक 6 वर्षों के लिए चलेगी।
Q2. इस योजना के तहत कितने जिलों को चुना जाएगा?
A: देश के 100 ऐसे जिलों को चुना जाएगा जहाँ कृषि उत्पादन, फसल तीव्रता और ऋण उपलब्धता कम है।
Q3. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A: इसका मुख्य उद्देश्य चयनित जिलों में कृषि उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और देश को खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बनाना है।
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