आजकल कई भारतीय टैक्सपेयर्स के इनबॉक्स में एक विशेष ईमेल आ रहा है। इस ईमेल में आयकर विभाग (Income Tax Department) सूचित कर रहा है कि विदेशी अधिकारियों से मिले डेटा के अनुसार आपके पास Foreign Assets (विदेशी संपत्ति) हैं, जिन्हें आपने अपनी ITR (Income Tax Return) में घोषित नहीं किया है।
अगर आपको भी ऐसा ईमेल मिला है, तो घबराने के बजाय इसे सही तरीके से समझना और रिस्पॉन्स करना जरूरी है। आइए जानते हैं इसके नियम, प्रक्रिया और समाधान।

यह ईमेल क्यों आ रहा है? (The Reason Behind Foreign Asset Mails)
भारत सरकार का कई देशों (जैसे USA) के साथ डेटा शेयरिंग एग्रीमेंट है। यदि आप निम्नलिखित में से कुछ भी होल्ड करते हैं, तो विभाग के पास उसकी जानकारी पहुंच जाती है:
- INDmoney या Vested जैसे ऐप्स के जरिए खरीदे गए अमेरिकी स्टॉक्स (US Stocks)।
- मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) से मिले ESOPs या RSU Units।
- विदेश में स्थित बैंक अकाउंट या प्रॉपर्टी।
- विदेशी इंश्योरेंस पॉलिसी या ट्रस्ट में हिस्सेदारी
Schedule FA क्या है और यह क्यों जरूरी है?
आयकर नियमों के अनुसार, यदि आप भारत के ‘रेसिडेंट’ (Resident) नागरिक हैं, तो आपको अपनी वैश्विक आय और संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य है। इसके लिए ITR में Schedule FA (Foreign Assets) और Schedule FSI (Foreign Tax Credit) भरना पड़ता है।
महत्वपूर्ण नोट: यदि आपके पास विदेशी संपत्ति है, तो आप ITR-1 या ITR-4 फाइल नहीं कर सकते। आपको अनिवार्य रूप से ITR-2 या ITR-3 ही फाइल करनी होगी।
रिपोर्टिंग के मुख्य नियम:
- कैलेंडर ईयर का पालन: भारत में टैक्स साल अप्रैल से मार्च चलता है, लेकिन Schedule FA के लिए अक्सर ‘कैलेंडर ईयर’ (जनवरी से दिसंबर) के डेटा की आवश्यकता होती है।
- करेंसी कन्वर्जन: विदेशी संपत्ति की वैल्यू को SBI के TT Buying Rate के अनुसार भारतीय रुपयों में बदलना होता है।
- पेनल्टी (Penalty): यदि आप ₹20 लाख से अधिक की विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं करते हैं, तो Black Money Act के तहत ₹10 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।
नोटिस मिलने पर क्या करें? (How to Respond)
आयकर विभाग आपको अपनी गलती सुधारने का मौका देता है। आप 31 दिसंबर तक अपनी Revised ITR फाइल कर सकते हैं।
- Revised ITR: इसमें कोई अतिरिक्त पेनल्टी नहीं लगती (यदि टैक्स लायबिलिटी न हो)।
- Updated ITR (U/S 139(8A)): यदि आप पिछले 2-3 सालों की गलती सुधारना चाहते हैं, तो आप अपडेटेड रिटर्न भर सकते हैं, हालांकि इसमें कुछ अतिरिक्त टैक्स/पेनल्टी देनी पड़ सकती है।
विदेशी आय पर टैक्स क्रेडिट (Double Taxation Avoidance)
यदि आपने अमेरिका जैसे देश में पहले ही टैक्स (जैसे डिविडेंड पर 25%) चुका दिया है, तो आप भारत में Section 90/91 और Form 67 के जरिए टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं। इससे आपको एक ही आय पर दो बार टैक्स नहीं देना होगा।
निष्कर्ष: विदेशी संपत्तियों को छिपाना भारी पड़ सकता है। यदि आपसे गलती हुई है, तो समय रहते अपनी ITR रिवाइज करें। टैक्स संबंधी अधिक जानकारी के लिए आप Income Tax India की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. क्या छोटे निवेश (जैसे ₹5000 के US Stocks) को भी घोषित करना जरूरी है?
हाँ, विदेशी संपत्ति के मामले में कोई न्यूनतम सीमा (Threshold) नहीं है। ₹1 का भी निवेश है तो Schedule FA भरना अनिवार्य है।
Q2. मैंने इस साल शेयर नहीं बेचे, तो क्या रिपोर्टिंग जरूरी है?
जी हाँ। Schedule FA में ‘होल्डिंग्स’ की जानकारी देनी होती है, भले ही आपने कोई मुनाफा (Profit) न कमाया हो।
Q3. क्या NRI को भी अपनी विदेशी संपत्ति भारत में दिखानी होगी?
नहीं, यह नियम केवल भारत के ‘Resident and Ordinarily Resident’ (ROR) टैक्सपेयर्स के लिए है।
Q4. क्या मुझे केवल विदेशी बैंक बैलेंस दिखाना है या स्टॉक की वैल्यू भी?
आपको दोनों की जानकारी देनी होगी। Schedule FA के अलग-अलग सेक्शन होते हैं:
- A1: विदेशी बैंक खाते (Foreign Bank Accounts)
- A3: विदेशी इक्विटी और डेब्ट इन्वेस्टमेंट (जैसे US Stocks, ETFs)
- B: अन्य संपत्ति जैसे रियल एस्टेट। आपको साल के दौरान का ‘पीक बैलेंस’ (Peak Balance) और ‘क्लोजिंग बैलेंस’ दोनों रिपोर्ट करने होते हैं।
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