NICDC – छोटा इंट्रो (Introduction) 🚀
भारत के आर्थिक विकास को गति देने और देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के उद्देश्य से नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) 12 नई स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटीज़ विकसित कर रहा है। NICDC के चेयरमैन और एमडी रजत सैनी ने बताया कि इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और दिसंबर 2025 तक इनमें से 10 से 11 शहरों में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘गोल्डन क्वाड्रिलेटरल’ पर इन शहरों को एक ‘ग्रैंड नेकलेस’ की तरह सजाने के विजन को साकार करेगी।
NICDC महत्वपूर्ण प्रगति: एक दशक की यात्रा 🏗️

NICDC ने स्पष्ट किया कि स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटीज़ पर काम पिछले साल शुरू नहीं हुआ, बल्कि यह एक दशक पुराना प्रोजेक्ट है।
- पुराने प्रोजेक्ट्स: NICDC ने पहले ही आठ औद्योगिक शहरों को मंजूरी दे दी है।
- इनमें से चार शहर पूरी तरह से बनकर तैयार हैं और उनमें लगभग पूरा कब्ज़ा हो चुका है।
- इन चार में धीरा (Dholera) भी शामिल है, जो भारत की पहली और एकमात्र सेमीकंडक्टर सिटी है।
- नए प्रोजेक्ट्स (12 शहर): पिछले साल मंजूर हुए ये 12 नए औद्योगिक शहर 10 राज्यों और 6 औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) में फैले हुए हैं।
- सामूहिक टीम वर्क और मार्गदर्शन के चलते, NICDC ने इनके विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) और अनुमान तैयार कर लिए हैं।
- दिसंबर 2025 तक, इन 12 में से कम से कम 10 से 11 शहरों में ठेकेदारों की नियुक्ति के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है, जो इस पैमाने के प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
वैश्विक निवेश में रुचि (Global Interest) 🌐
भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहतर नीतियों और बुनियादी ढांचे के कारण NICDC शहर विदेशी निवेशकों के लिए पहली पसंद बन गए हैं।
- 15 से 20 देशों की रुचि: लगभग 15 से 20 देशों ने NICDC स्मार्ट सिटीज़ में व्यावसायिक इकाइयाँ स्थापित करने में रुचि दिखाई है।
- आकर्षण का कारण: यहाँ के बुनियादी ढांचे के मानक (Standards) और गुणवत्ता, साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में नीतिगत भरोसा (Predictability) निवेशकों को आकर्षित करता है।
- प्रमुख निवेशक: पूर्वी एशियाई देशों, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) वाले देशों, और उन निवेशकों से महत्वपूर्ण रुचि देखी जा रही है जो एशिया में एक स्थिर विनिर्माण आधार चाहते हैं।
- निर्यात पर जोर: पिछले कुछ वर्षों में यह ट्रेंड देखा जा रहा है कि कंपनियाँ केवल भारतीय घरेलू बाज़ार के लिए ही नहीं, बल्कि अन्य देशों को निर्यात (Export) करने के लिए भी भारत को विनिर्माण केंद्र बना रही हैं, जो 2014 से पहले लगभग शून्य था।
लॉजिस्टिक्स लागत में बड़ी कमी: डेटा बैंक 2.0 (Logistics Data Bank) 📉
लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के प्रयासों में नेशनल लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (NLDB) एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है।
- उपलब्धि: इन सामूहिक प्रयासों से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत पहले के 13.6% के अनुमान से घटकर लगभग 8% पर आ गई है।
- डेटा बैंक का रोल:
- दृश्यता (Visibility): लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक 1.0 ने निर्यातकों, आयातकों और निर्माताओं को यह जानने में मदद की कि उनका कंटेनर कहाँ है।
- पॉलिसी मेकिंग: इसने नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद की कि माल कहाँ फँस रहा है और कहाँ हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
- लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक 2.0: वाणिज्य मंत्री द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए NLDB 2.0 से देश के भीतर और यहाँ तक कि खुले समुद्रों (High Seas) पर भी कार्गो की निरंतर आवाजाही देखना संभव हो सकेगा। इससे आयातकों और निर्यातकों के लिए भविष्यवाणी (Predictability) बहुत बढ़ जाएगी, जिससे वे अपने शिपमेंट को अधिक कुशलता से प्रबंधित कर सकेंगे।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) 💡
Q: धीरा (Dholera) शहर किस लिए महत्वपूर्ण है?
A: धीरा भारत की पहली और एकमात्र सेमीकंडक्टर सिटी है, जहाँ पहला सेमीकंडक्टर फैब प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
Q: NICDC द्वारा विकसित किए जा रहे नए 12 औद्योगिक शहर कहाँ स्थित हैं?
A: ये शहर 10 राज्यों में फैले हुए हैं और भारत के 6 औद्योगिक गलियारों को कवर करते हैं।
Q: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत में कितनी कमी आई है?
A: लॉजिस्टिक्स लागत अनुमानित 13.6% से घटकर लगभग 8% पर आ गई है।
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