साल 2022 में उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की जघन्य हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। यह एक ऐसी घटना थी जिसने समाज में एक गहरी चिंता पैदा की और न्याय की मांग को तेज किया। इसी दर्दनाक घटना पर आधारित फिल्म “Udaipur Files “ हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म की रिलीज से पहले ही कई कानूनी अड़चनें आईं, जिनमें से हमलावरों द्वारा इसकी रिलीज को रोकने की कोशिश भी शामिल थी। हालांकि, कोर्ट के आदेश के बाद फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचने का मौका मिला।

फिल्म के मुख्य कलाकारों में जाने-माने अभिनेता विजय राज शामिल हैं, जिन्होंने कन्हैया लाल का किरदार निभाया है। फिल्म देखने के बाद कन्हैया लाल के बेटों की प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया कि यह कहानी उनके दर्द को फिर से सामने लाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक संवेदनशील विषय पर बनी यह फिल्म उस दर्द को न्याय दे पाई है या यह सिर्फ एक मौका था जिसका सही इस्तेमाल नहीं किया जा सका? क्या “द कश्मीर फाइल्स” या “द केरला स्टोरी” जैसी फिल्मों की तरह यह भी दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ पाती है? इस विस्तृत रिव्यू में हम फिल्म के हर पहलू का विश्लेषण करेंगे।
Udaipur Files की कहानी और उसका संवेदनशील आधार
Udaipur Files की कहानी कन्हैया लाल की सच्ची घटना पर आधारित है। फिल्म में कन्हैया लाल, एक साधारण दर्जी, को दिखाया गया है जो अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जी रहे होते हैं। फिल्म की शुरुआत उदयपुर शहर में पनप रहे सांप्रदायिक तनाव, मंदिर-मस्जिद विवादों और दंगों की आग से होती है, जो पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लेती है। इसी माहौल में, कन्हैया लाल की जिंदगी उस वक्त बदल जाती है, जब पुनीत वशिष्ठ द्वारा निभाए गए खलनायक ‘निजाम’ की एंट्री होती है।
फिल्म में विजय राज ने कन्हैया लाल का किरदार बेहद संवेदनशीलता से निभाया है। उनके अभिनय में एक साधारण व्यक्ति का दर्द और उसकी बेबसी साफ झलकती है। इसके अलावा, फिल्म में रजनीश दुग्गल एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में और प्रीति झायानी एक न्यूज एंकर के रूप में दिखाई देती हैं, जो घटना की जांच और रिपोर्टिंग का एंगल जोड़ते हैं। फिल्म का विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है और यह एक ऐसी कहानी है जिसे बताना समाज के लिए जरूरी था।
क्या ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तरह दमदार है यह फिल्म?
द कश्मीर फाइल्स और द केरला स्टोरी जैसी फिल्मों की तारीफ इसलिए की गई थी क्योंकि उन्होंने संवेदनशील कहानियों को गहराई और प्रभाव के साथ पेश किया था। उन्होंने कहानी के हर पहलू को सलीके से दिखाया, जिससे दर्शकों ने उस दर्द को महसूस किया। लेकिन Udaipur Files इस पैमाने पर खरी नहीं उतर पाती है।
यह फिल्म एक “खिचड़ी” बनकर रह गई है। इसकी कहानी बहुत ज्यादा बिखरी हुई है और इसमें एक साथ कई विषयों को छूने की कोशिश की गई है, जिनमें धर्म, राजनीति, पुलिस जांच और यहां तक कि अनावश्यक रोमांस भी शामिल है। कोई भी सब-प्लॉट पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता और बीच में ही गायब हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे स्क्रिप्ट के कुछ पन्ने बीच में से हटा दिए गए हों। यह बिखरा हुआ कथानक दर्शकों को भ्रमित करता है और फिल्म के मुख्य संदेश को कमजोर कर देता है।
Udaipur Files की कमजोरियां: बिखरी हुई कहानी से खराब डबिंग तक
Udaipur Files की कमियों की लिस्ट काफी लंबी है, जो फिल्म के गंभीर विषय के लिए एक दुखद बात है।
1. बिखरी हुई स्क्रिप्ट और असंगत पेसिंग
फिल्म की स्क्रिप्ट एक “हेडलेस चिकन” की तरह लगती है, जो बिना किसी दिशा के इधर-उधर भाग रही है। एक पल में फिल्म सांप्रदायिक तनाव पर केंद्रित होती है, तो अगले ही पल एक अलग केस की जांच शुरू हो जाती है। यह असंगत पेसिंग दर्शकों को उबाऊ लगती है और फिल्म के प्रवाह को बाधित करती है।
2. घटिया प्रोडक्शन और डबिंग
फिल्म का प्रोडक्शन मूल्य बेहद कम है। कई दृश्य टीवी सीरियल की तरह लगते हैं, और एक जगह तो एक एआई-जनरेटेड जैसा सीन भी दिखाई देता है, जिसका कहानी से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा, फिल्म का सबसे बड़ा दोष इसकी डबिंग है। लगभग 80% फिल्म में कैरेक्टर्स के होंठ और डायलॉग्स आपस में मेल नहीं खाते, जिससे दर्शकों का ध्यान भंग होता है।
3. कमजोर पात्र और अभिनय
फिल्म का खलनायक ‘निजाम’ बहुत ही कार्टूनिस्ट लगता है। वह क्राइम पेट्रोल के एक असफल किरदार की तरह है, जो दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाता। यहां तक कि विजय राज जैसा एक मंझा हुआ कलाकार भी इस बिखरी हुई स्क्रिप्ट में जान डालने के लिए संघर्ष करता नजर आता है। बाकी कलाकारों का अभिनय भी औसत दर्जे का है।
4. म्यूजिक और टोन
फिल्म का म्यूजिक पूरी तरह से भुला देने लायक है। कुछ सीन में धार्मिक संगीत का इस्तेमाल पर्यटन का विज्ञापन जैसा लगता है, जो फिल्म की गंभीरता को कम करता है। मेकर्स ने एक सेंसिटिव टॉपिक को संजीदगी से दिखाने के बजाय उसे सनसनीखेज बनाने की कोशिश की है।
मेकर्स की नीयत पर सवाल: न्याय या सनसनी?
एक संवेदनशील विषय पर फिल्म बनाते समय मेकर्स के कंधों पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्हें कहानी को बहुत ही सावधानी और संवेदनशीलता से पेश करना होता है। लेकिन Udaipur Files के मेकर्स इस जिम्मेदारी को निभाने में चूक गए हैं।
फिल्म कन्हैया लाल की दर्दनाक कहानी को गहराई से बताने के बजाय, उसे सिर्फ सनसनीखेज बनाने की कोशिश करती है। यह दर्शकों को असहज कर सकती है और मेकर्स की नीयत पर सवाल उठा सकती है कि क्या यह फिल्म वास्तव में न्याय के लिए बनी थी या सिर्फ एक अवसर का फायदा उठाने के लिए?
कन्हैया लाल की कहानी एक बेहतर सिनेमैटिक ट्रीटमेंट की हकदार थी, जिसमें गहराई, संवेदनशीलता और एक स्पष्ट दृष्टिकोण होता। इस फिल्म में इन सभी चीजों की कमी महसूस होती है।
हमारी अन्य मूवी रिव्यू पढ़ें: बाघी 4 टीज़र रिव्यू: टाइगर श्रॉफ का ‘ए-रेटेड’ एक्शन
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या ‘उदयपुर फाइल्स’ सच्ची कहानी पर आधारित है? A: हाँ, यह फिल्म उदयपुर में हुई कन्हैया लाल की हत्या की सच्ची घटना पर आधारित है।
Q2. फिल्म को विवादों का सामना क्यों करना पड़ा? A: हमलावरों ने यह कहते हुए फिल्म को रोकने की कोशिश की थी कि इससे मुकदमे की सुनवाई प्रभावित होगी।
Q3. मुख्य भूमिका किसने निभाई है? A: कन्हैया लाल का किरदार अभिनेता विजय राज ने निभाया है।
Q4. फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी कैसी है? A: फिल्म की प्रोडक्शन क्वालिटी कमजोर है, और यह कई जगहों पर टीवी सीरियल जैसी लगती है।
Q5. फिल्म का अंतिम फैसला क्या है? A: फिल्म एक महत्वपूर्ण कहानी को संजीदगी से पेश करने में विफल रही है। यह एक मिसड अपॉर्चुनिटी लगती है।
निष्कर्ष
“Udaipur Files” एक बहुत ही महत्वपूर्ण कहानी को लेकर आती है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि यह कहानी के साथ पूरी तरह से न्याय नहीं कर पाती है। फिल्म की बिखरी हुई स्क्रिप्ट, खराब प्रोडक्शन, कार्टूनिस्ट विलेन और असंगत पेसिंग इसे एक औसत दर्जे का अनुभव बना देते हैं। हालांकि विजय राज का अभिनय सराहनीय है, लेकिन एक अच्छा अभिनेता भी कमजोर स्क्रिप्ट को नहीं बचा सकता।