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ice cube की नई फिल्म ‘War of the Worlds’: समीक्षकों की नजर में सबसे बड़ी निराशा?

H K SINGH
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War of the Worlds

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Hollywood के दिग्गज रैपर और एक्टर ice cube की नई फिल्म War of the Worlds हाल ही में अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है। एच.जी. वेल्स के क्लासिक उपन्यास पर आधारित इस फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों में काफी उत्सुकता थी। लेकिन, रिलीज के बाद जो प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वह काफी चौंकाने वाली हैं। जहां आइस क्यूब के फैंस उनकी वापसी से उत्साहित थे, वहीं फिल्म ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कई समीक्षकों ने तो इसे अपने जीवन की सबसे खराब फिल्मों में से एक बताया है। यह एक ऐसी कहानी है जिसे कहने का तरीका भले ही नया था, लेकिन उसकी पटकथा में इतनी खामियां हैं कि यह एक अच्छी फिल्म बनने से कोसों दूर रह गई।

 

प्लॉट और नए दृष्टिकोण का विश्लेषण

 

यह फिल्म ‘War of the Worlds‘ की कहानी को एक अलग नजरिए से पेश करने की कोशिश करती है। पूरी फिल्म वेबकैम, फोन कैमरे और कंप्यूटर स्क्रीन के माध्यम से दिखाई गई है। सैद्धांतिक रूप से, यह एक दिलचस्प विचार लगता है कि एक एलियन आक्रमण को तकनीक के माध्यम से कैसे देखा जा सकता है, लेकिन इसका निष्पादन बेहद निराशाजनक है। यह फिल्म देखने में एक दर्दनाक अनुभव बन जाती है। आइस क्यूब एक उच्च-स्तरीय सरकारी डेटा विश्लेषक की भूमिका में हैं, जो अपनी ही सरकार के लिए नागरिकों की जासूसी करता है, यहां तक कि अपने बच्चों पर भी नजर रखता है। कहानी तब और भी बेतुकी हो जाती है जब एक बड़ा रहस्योद्घाटन होता है।

कहानी के दो सबसे बेतुके मोड़: पहला, जिस सबसे बड़े हैकर को ice cube की सरकार दुनिया भर में ढूंढ रही होती है, वह कोई और नहीं बल्कि उसका अपना टीनएजर बेटा निकलता है। यह एक ऐसा मोड़ है जो दर्शकों को कहानी से और भी दूर कर देता है।

दूसरा, और शायद सबसे बड़ा, यह है कि एलियंस को पृथ्वी के पानी या संसाधनों की नहीं, बल्कि ‘डेटा’ की भूख है। हां, आपने सही सुना। कहानी के अनुसार, एलियंस कंप्यूटर डेटा खाते हैं, और उनका धरती पर आने का मकसद इसी डेटा को खाना है। यह एक ऐसा प्लॉट है जो विज्ञान-फाई शैली के सभी नियमों का उल्लंघन करता है और इसे हास्यास्पद बना देता है।

 

अभिनय और तकनीकी खामियां

 

आइस क्यूब ने अपनी भूमिका में एक हद तक अच्छा काम किया है। एक गंभीर और सतर्क डेटा विश्लेषक के रूप में उनका किरदार ठीक-ठाक लगता है। हालांकि, फिल्म में बाकी सभी कलाकारों का प्रदर्शन बहुत ही कमजोर है। संवाद इतने खराब हैं कि वे दर्शकों को बांधे रखने में असफल रहते हैं। इसके अलावा, फिल्म में अमेज़न प्राइम वीडियो की ब्रांडिंग इतनी प्रमुख है कि यह एक फिल्म से ज्यादा एक लंबे विज्ञापन की तरह महसूस होती है।

तकनीकी रूप से भी फिल्म कमजोर है। एलियन आक्रमण के दृश्य और स्पेशल इफेक्ट्स बहुत ही घटिया स्तर के हैं। एक ऐसे समय में जब हॉलीवुड शानदार विजुअल इफेक्ट्स के लिए जाना जाता है, इस फिल्म के विजुअल्स निराश करते हैं। यह शायद ‘सर्चिंग’ जैसी फिल्मों की तरह ऑनलाइन स्क्रीन वाले प्रारूप का उपयोग करने की कोशिश थी, लेकिन यह पूरी तरह से विफल रही।

 

निष्कर्ष: क्या यह ‘मोरबियस’ से भी खराब है?

 

समीक्षक तो यहां तक कह रहे हैं कि यह फिल्म मार्वल की आलोचनाओं का शिकार हुई फिल्म ‘मोरबियस’ से भी ज्यादा खराब है। जहां ‘मोरबियस’ में कुछ अच्छे पल थे, वहीं ‘War of the Worlds‘ में ऐसा कुछ भी नहीं है जो दर्शकों को प्रभावित कर सके। अगर आप एच.जी. वेल्स के क्लासिक उपन्यास या 1953 की मूल फिल्म के प्रशंसक हैं, तो इस फिल्म को देखना आपके लिए निराशाजनक हो सकता है।

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H K Singh एक युवा डिजिटल पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें सरकारी योजनाएँ (रोजगार योजनाएँ, छात्रवृत्ति आदि),शिक्षा से जुड़ी खबरें (एग्जाम, रिजल्ट, एडमिशन अपडेट),ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (नई गाड़ियाँ, बाइक, इलेक्ट्रिक स्कूटर, रिव्यू) और देश-दुनिया की ताज़ा खबरेंसे जुड़ी खबरों पर गहन अनुभव है। पिछले 5 वर्षों से ये ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम कर रहे हैं और पाठकों तक भरोसेमंद और तथ्यात्मक जानकारी पहुँचाना इनका मुख्य उद्देश्य है।H K Singh ललित नारायण मिथिला विश्वविधालय से B.COM की पढाई पूरा किया है और साथ में ऐप डेवलपर, डिजिटल मार्केटर और कंटेंट क्रिएटर का भी कोर्स पूरा किया। अभी WWW.BHARATKHABARLIVE.COM के मालिक है।
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