क्या आप रात में बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं, फिर भी नींद नहीं आती? या आपके पार्टनर को आपके खर्राटों से परेशानी होती है? अगर ऐसा है तो ये सिर्फ़ नींद की कमी नहीं, बल्कि किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। हमारे समाज में नींद से जुड़ी समस्याओं को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन ये स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा हो सकते हैं। इस लेख में, हम नींद की विभिन्न समस्याओं अनिद्रा और खर्राटे, उनके कारणों और इलाज के बारे में विस्तार से जानेंगे।

नींद से जुड़ी प्रमुख समस्याएँ और उनके लक्षण
डॉक्टर शर्मा बताते हैं कि नींद से जुड़ी समस्याएँ कई प्रकार की होती हैं, जिनमें से मुख्य चार श्रेणियाँ हैं:
- अनिद्रा (Insomnia): यह सबसे आम समस्या है, जिसमें व्यक्ति को या तो नींद नहीं आती, या बार-बार नींद टूट जाती है, या वह सुबह जल्दी उठ जाता है और दोबारा सो नहीं पाता। इसका सीधा असर दिनभर की गतिविधियों पर पड़ता है, जिससे थकावट, एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।
- स्लीप एपनिया (Sleep Apnea): यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें सोते समय साँस कुछ सेकंड के लिए रुक जाती है। यह अक्सर ज़ोरदार खर्राटों से शुरू होती है। हमारा समाज खर्राटों को अच्छी नींद का संकेत मानता है, लेकिन वास्तव में यह एक चेतावनी है। जब साँस रुकती है, तो दिमाग़ को सिग्नल जाता है और व्यक्ति अचानक जाग जाता है। यह प्रक्रिया रात भर बार-बार होती रहती है, जिससे नींद की क्वालिटी खराब होती है।
- पैरासोम्नियास (Parasomnias): इसमें सोते समय अजीबोगरीब व्यवहार शामिल होता है, जैसे नींद में चलना, बातें करना, दाँत किटकिटाना (ब्रक्सिज्म), या खाते रहना। बच्चों में यह समस्या टॉन्सिल बढ़ने की वजह से भी हो सकती है, जो समय के साथ ठीक हो जाती है, लेकिन वयस्कों में यह स्लीप एपनिया जैसी किसी अंतर्निहित बीमारी का लक्षण हो सकती है।
- रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless Legs Syndrome): यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय पैरों में बेचैनी, ऐंठन या झुनझुनी होती है। व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि कोई उनके पैर दबा दे तो आराम मिलेगा। यह समस्या ज़्यादातर महिलाओं, बुजुर्गों और मोटे लोगों में देखी जाती है। इसके मुख्य कारणों में एनीमिया (फेरिटिन की कमी), इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, या स्लीप एपनिया शामिल हैं।
खर्राटे एक चेतावनी क्यों हैं?
खर्राटे लेना सामान्य नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि आपके वायुमार्ग (Airway) में कोई रुकावट है। जब आप सोते हैं, तो मांसपेशियों के ढीले होने के कारण वायुमार्ग संकरा हो जाता है। हवा के निकलने से कंपन होता है और खर्राटे की आवाज़ आती है। जब यह रुकावट गंभीर हो जाती है, तो साँस पूरी तरह से रुक जाती है, जिसे एपनिया कहते हैं।
यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। यदि साँस का अवरोध इतना बढ़ जाए कि दिमाग़ को जागने का सिग्नल न मिले, तो व्यक्ति को सोते समय ही दिल का दौरा पड़ सकता है। हाल ही में गायक बप्पी लाहिड़ी का निधन भी स्लीप एपनिया की वजह से हुआ था। इसलिए खर्राटों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
स्लीप एपनिया के जोखिम कारक और स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्लीप एपनिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ लोग इसके ज़्यादा जोखिम में होते हैं:
- मोटापा, खासकर गर्दन और पेट के आस-पास का मोटापा।
- छोटी गर्दन या छोटी हाइट।
- बड़ी जीभ या पीछे की ओर धँसा हुआ जबड़ा ।
- बढ़े हुए टॉन्सिल।
- हाइपोथायरायडिज्म और हृदय रोग से पीड़ित लोग।
यदि स्लीप एपनिया का इलाज न किया जाए, तो यह कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है:
- हृदय रोग: हृदय पर अतिरिक्त दबाव के कारण दिल का दौरा पड़ने का ख़तरा बढ़ जाता है।
- उच्च रक्तचाप (Hypertension): शरीर में ऑक्सीजन की कमी से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जिसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
- डायबिटीज: यह शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित करता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है।
- गैस्ट्रिक समस्याएँ: पाचन संबंधी समस्याएँ भी हो सकती हैं।
- मस्तिष्क संबंधी विकार: ब्रेन में ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से याददाश्त और एकाग्रता में कमी आ सकती है, और अल्ज़ाइमर जैसी भूलने वाली बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है।
अच्छी नींद के लिए कुछ आवश्यक उपाय
नींद की समस्या का सबसे बेहतर इलाज किसी विशेषज्ञ से परामर्श लेना है, लेकिन कुछ घरेलू उपाय भी मददगार हो सकते हैं:
- अच्छी स्लीप हाइजीन (Sleep Hygiene) बनाएँ: हर दिन एक निश्चित समय पर सोने और उठने की आदत डालें। सोने से पहले कैफीन, शराब और निकोटीन से बचें।
- माहौल तैयार करें: सोने से पहले कमरे को शांत, अँधेरा और ठंडा रखें। सोने से पहले टीवी या फ़ोन के इस्तेमाल से बचें।
- हल्दी वाला दूध: सदियों से हल्दी वाला दूध नींद के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक औषधि माना जाता है। इसे सोने से पहले पीना फ़ायदेमंद होता है।
यदि ये उपाय काम न करें और लक्षण दो से तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1: क्या खर्राटे लेना हमेशा स्लीप एपनिया का संकेत होता है?
A1: नहीं, लेकिन ज़ोरदार और लगातार खर्राटे स्लीप एपनिया का सबसे आम लक्षण हैं। यदि आपके खर्राटे आपके पार्टनर की नींद खराब कर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
Q2: नींद में चलने या बातें करने की समस्या क्यों होती है?
A2: यह पैरासोम्निया नामक स्लीप डिसऑर्डर का हिस्सा है। यह मस्तिष्क और नींद के चरणों से जुड़ा होता है। वयस्कों में यह स्लीप एपनिया से संबंधित हो सकता है।
Q3: रेस्टलेस लेग सिंड्रोम का मुख्य कारण क्या है?
A3: रेस्टलेस लेग सिंड्रोम अक्सर शरीर में आयरन (फेरिटिन) की कमी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या एनीमिया के कारण होता है।
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